Nymphaea thermarum

Nymphaea thermarum विश्व की सबसे छोटी वाटर लिली है, और Nymphaea की ऐसी एकमात्र प्रजाति है जो पानी के बजाय आर्द्रतायुक्त कीचड़ में उगती है।

Nymphaea thermarum के पुष्प
Nymphaea thermarum के पुष्प (चित्र: एंड्रू मैकरॉब, RBG Kew)

प्रजाति संबंधी जानकारी

  • वैज्ञानिक नाम: Nymphaea thermarum Eb.Fisch.
  • प्रचलित नाम: इस समय कोई नहीं।
  • संरक्षण स्थिति: जंगल से लुप्त।
  • प्राकृतिक वास: गर्म पानी के झरनों के ताजा पानी के उफान से निर्मित आर्द्रतायुक्त कीचड़ जहाँ पर पानी 25˚ सेंटीग्रेट तक ठंडा हो जाता है।
  • मुख्य प्रयोग: यह प्रजाति हमेशा इतनी विरल रही है कि इसका कोई उपयोग कभी ज्ञात नहीं रहा है।
  • ज्ञात खतरे: कोई भी ज्ञात नहीं।

वर्गीकरण

  • वर्ग: इक्विसेटोप्सिडा
  • उप-वर्ग: मैग्नोलिडा
  • उपगण: निंफैइएना
  • गण: निंफैएल्स
  • परिवार: निंफैइएसी
  • वंश: Nelumbo

इस प्रजाति के बारे में

यह ‘ऊष्मीय’ वाटर लिली, जो गर्म पानी के झरनों के ताजे पानी के इर्दगिर्द उगी हुई थी, सन् 1987 में कोब्लेंज लैंडाउ विश्वविद्यालय (Koblenz-Landau University) के जर्मन वनस्पति विज्ञानी प्रोफेसर एबरहार्ड फिशर द्वारा खोजी गई। इसे दक्षिण पश्चिमी रवांडा में मैशियुज़ा के केवल एक स्थान से जाना गया। लेकिन इस दुर्बल वास को पोषित करने वाले गर्म पानी के झरने के अत्यधिक शोषण के कारण यह दो वर्ष पूर्व वहाँ से लुप्त हो गई। पानी को सतह पर पहुँचने से रोक दिया गया, जिसका परिणाम यह हुआ कि कुछ वर्ग मीटर का वह क्षेत्र, जिस पर यह प्रजाति उगती थी, सूख गई, और इस समय इसका ऐसा कोई पौधा ज्ञात नहीं है, जो जंगल में जीवित हो।

भौगोलिकता एवं वितरण

जंगलों से लुप्त होने से पहले Nymphaea thermarum मैशियुज़ा, दक्षिण पश्चिमी रवांडा (अफ्रीका) में पाई जाती थी। इस समय जीवित इसके सभी पौधे Kew और जर्मनी में उगाए जा रहे हैं।

विवरण

Kew में उगाई जा रही Nymphaea thermarum प्रजाति

Kew में उगाई जा रही Nymphaea thermarum प्रजाति (चित्र: एंड्रू मैकरॉब, RBG Kew)

एक छोटी वाटरलिली, 10-20 सेमी चौड़ाई वाले स्तरों (रोज़ेट्स) का निर्माण करती है, जिसमें छोटे पर्णवृंतों वाली चमकीले हरे रंग की लिली गद्दियाँ (पटल) समाविष्ट होती हैं। लिली गद्दियाँ इतनी छोटी हो सकती हैं कि उनका व्यास केवल 1 सेमी हो सकता है। अंकुरित होता केंद्रीय सिरा नमीयुक्त कीचड़ में डूबा रहता है, जिससे विकासशील गद्दियाँ खुलने से पहले सूख नहीं पातीं।

पीले रंग के पुंकेसर से युक्त पुष्प श्वेत रंग के होते हैं और वे स्वतः के परागण कर सकते हैं। पुष्प भोर में खिलते हैं और अपराह्न के प्रारंभ में बंद हो जाते है। पुष्प पौधे से कुछ सेमी ऊपर ऊर्ध्वाधर स्थित में धारण किए जाते हैं पर उनका पुष्पण चक्र पूरा होने के बाद पर्णवृंत इस प्रकार झुक जाते हैं कि फलों का संपर्क आर्द्रतायुक्त कीचड़ से हो जाता है। परिपक्व हो जाने पर फल गल जाता है और बीजों को मुक्त कर देता है। पुनरुत्पादन केवल बीजों के माध्यम से होता है।

संकट एवं संरक्षण

इस प्रजाति की एकमात्र आबादी उस जलभर के अत्यधिक शोषण के कारण मर गई जिसकी वजह से गर्म पानी का वह झरना पोषित था जो पौधों को नम और एक स्थिर तापमान पर रखता था।

लेकिन, चूँकि अब Kew में इस प्रजाति का प्रसारण और खेती आसानी से हो रही है और झरने का पानी अब भी बह रहा है (लेकिन सतह तक पहुँचने से पहले ही उसे रोक दिया जाता है), अतः उस क्षेत्र (पौधे के मूल वास) का पुनरुद्धार करने और Nymphaea thermarum को रवांडा में पुनः प्रस्तुत करने का अवसर अब भी प्राप्त हो सकता है।

प्रयोग

यह प्रजाति हमेशा इतनी विरल रही है कि इसका कोई प्रयोग कभी ज्ञात नहीं रहा है। लेकिन, Nymphaea thermarum में शोभाकारी संकर प्रजातियों का जनक होने की क्षमता संभावित थी, लाभदायक स्थिति यह होती कि इनसे जनित होने वाले पौधे काफी छोटे होते और इन्हें उगने और पनपने के लिए पोखरे की आवश्यकता नहीं होती। वाटर लिली की कुछ अन्य प्रजातियों का उपयोग स्थानीय स्तर पर भोजन के स्रोत के रूप में किया जाता है, जैसे कि एशिया में Euryale ferox के बीजों और कुछ आस्ट्रेलियाई प्रजातियों को वहाँ के मूल निवासियों द्वारा आम तौर पर खाया जाता है। लेकिन, वाटरलिली की कुछ, लगभग 50 प्रजातियाँ ऐसी हैं कि यदि उन्हें अधिक मात्रा में खाया जाए तो वे विषैली सिद्ध हो सकती हैं।

खेती

यह एक असामान्य वाटरलिली प्रजाति है, और यह गहरे पानी में नहीं उगती। एक छोटे से पौध-पात्र को बढ़िया किस्म की दुम्मट मिट्टी से सिरे तक भर दिया जाना चाहिए और फिर उसे एक ऐसे वाटर-टाइट (ऐसा पात्र जिसमें से जल न निकल सके) कंटेनर बॉक्स में रख दिया जाना चाहिए जो अपेक्षाकृत चौड़ा हो और पौधपात्र से थोड़ा सा अधिक ऊँचा हो। उसके बाद कंटेनर को ठीक पौध पात्र और मिट्टी के सिरे की सतह तक पानी से भर दिया जाना चाहिए। मिट्टी के नम हो जाने और सतह पर बैठ जाने के बाद पौध को वाटर-टाइट कंटेनर से निकाल लिया जाना चाहिए, उसके बाद बीजों को सतह पर थोड़ी संख्या में छिड़का जा सकता है। पानी की सतह महत्त्वपूर्ण है (इसे 2 मिमी से अधिक नीचे या 0.5 मिमी से ऊपर नहीं जाना चाहिए), और बीजों को नम, लेकिन सतह के काफी करीब रहना चाहिए, ताकि जब वे अंकुरित हों तो वायु के संपर्क में रहें। पौधों को 22-26 ˚सेंटीग्रेट तापमान पर रखा जाना चाहिए उसके बाद पहले पहल निकलने वाली पत्तियाँ जल्दी ही उगेंगी। पौधे को सूर्य के पूर्ण प्रकाश के संपर्क में रहना चाहिए। पौधे जब प्रबंधित किए जाने के लिहाज से काफी बड़ी हो जाएँ (आम तौर पर तब जब उनमें पाँच पत्तियाँ निकल आएँ और उनका व्यास 5 मिमी हो जाए) तो उन्हें अलग-अलग पात्रों में स्थापित कर दिया जाना चाहिए। कुछ महीनों के बाद पुष्प प्रकट होने चाहिए।

Kew में यह प्रजाति

Kew के जीवित पौधों के संग्रह में Nymphaea thermarum के 50 से अधिक पौधे हैं, यह संसार का एक मात्र ऐसा स्थान है, जहाँ इनका बड़े पैमाने पर नियमित रूप से प्रसारण हो रहा है।

अस्तित्व लोपन के कगार से वापसी

अधिक जानकारी
Kew के सर्वोच्च प्रसारण 'कोड -ब्रेकर', कार्लोस मैगडेलेना

Kew के सर्वोच्च प्रसारण 'कोड -ब्रेकर', कार्लोस मैगडेलेना, नन्हीं वाटरलिली के साथ (छाया: एंड्रू मैकरॉब, RBG Kew)

Kew के सर्वोच्च प्रसारण 'कोड -ब्रेकर' (कोड को व्याख्यायित करने वाले), उद्यान विज्ञानी कार्लोस मैगडेलेना ने अफ्रीकी वाटरलिली की एक विरल प्रजाति को उगाने की पहेली को हल कर लिया है – जिसके बारे में माना जाता है कि यह संसार की सबसे छोटी वाटरलिली है जिसकी गद्दियों का व्यास महज 1 सेमी हो सकता है।

Nymphaea thermarum को सन् 1987 में जर्मन वनस्पति विज्ञानी प्रोफेसर एबरहार्ड फिशर ने खोजा था। वह मैशियुज़ा, रवांडा के केवल एक स्थान तक सीमित थी। लेकिन दो वर्ष पूर्व यह उस स्थान से गर्म पानी के उस झरने के अत्यधिक दोहन के कारण लुप्त हो गई जो इस दुर्बल वास को पोषित करता था, और इस समय जंगलों में इसकी कोई जीवित प्रजाति ज्ञात नहीं है।

खोज के तत्काल बाद प्रोफेसर फिशर ने अनुभव किया कि यह प्रजाति संकट में है और उन्होंने इसके कुछ पौधों को Bonn Botanic Gardens में भेज दिया। Bonn में वनस्पति विज्ञानी इस अति मूल्यवान नमूने को उगाने में अत्यधिक सफल रहे, और वे एक दशक से अधिक समय तक जीवित रहे। लेकिन इस प्रजाति का प्रसारण अति कठिन सिद्ध हुआ।

Nymphaea के पौधे।
Nymphaea के पौधे। N. thermarum के अतिरिक्त सभी Nymphaea पूरी तरह पानी के नीचे अंकुरित कराई गई हैं। (चित्र: एंड्रू मैकरॉब, RBG Kew)

Bonn और Kew के बीच पौध संरक्षण विनिमय के अंतर्गत कुछ बीज और पहले से अंकुरित कुछ पौधे जुलाई 2009 में Kew पहुँचे। N. thermarum के पौधों को प्रारंभ में अन्य वाटर लिली की तरह पानी की सतह के नीचे उगाया गया। लेकिन दोनों वानस्पतिक बगीचों में यह पद्धति असंतोषजनक सिद्ध हुई, विरले पौधे ही जीवित रहे और वयस्क स्थिति तक विकसित नहीं हो सके।

कार्लोस, जिनका दुर्लभ और अत्यधिक कठिन पौधों को अस्तित्व लोपन के कगार से वापस लाने का इतिहास रहा है, उन्होंने N. thermarum के प्रसारण की चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने परीक्षणों की कई श्रृंखलाएँ चलाईं जो विभिन्न स्तर के तापमानों, जलीय कठोरता, pH और गहराई से संबंधित थीं। कठोर जल और छिछली गहराई में उगाए जाने वाले पौधे और विकसित होने लगे, लेकिन कोई पौधा वयस्क अवस्था को प्राप्त नहीं कर सका।

उसके बाद कार्लोस ने पानी में गैसों की सांद्रता को परिवर्तित करने के तरीकों की जाँच-पड़ताल करने और इस पौधे के प्राकृतिक वास के बारे में जानकारी प्राप्त करने का निर्णय लिया। प्रजाति के बारे में मूल जर्मन विवरण पर लौटने से अंतिम संकेत (क्लू) मिला, “यह गर्म पानी के झरने के उफान के कारण नम होने के बाद बने कीचड़ में पनपती है। पानी सतह पर 50 °सेंटीग्रेट तापमान पर पहुँचता है लेकिन पौधा एक ऐसे क्षेत्र में अपनी बस्ती बसाता है जहाँ पानी ठंडा हो कर 25 °सेंटीग्रेट तापमान पर पहुँच जाता है।” इसका मतलब यह था कि अन्य ज्ञात वाटर लिली प्रजातियों की भाँति N. thermarum झीलों, नदियों या दलदलों के गहरे पानी में डूबी हुई स्थिति में नहीं उगती। इससे यह तथ्य अभिव्यक्त हुआ कि यह छोटी, अत्यधिक दुर्लभ और असामान्य प्रजाति गर्म पानी के झरने के किनारे पर नमीयुक्त अवस्थाओं में उगती है – और यह कोड को सुलझाने की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण क्लू था।

इस जानकारी के साथ कार्लोस ने एक अंतिम परीक्षण किया। उन्होंने बीजों और पौधों को पानी से भरे हुए छोटे कंटेनर बॉक्सों में रखे हुए दुम्मट मिट्टी भरे पात्रों में स्थापित किया, इस प्रकार उन्होंने 25 ° सेंटीग्रेट तापमान पर पानी के स्तर को कंपोस्ट की सतह की बराबरी पर ही रखा। इस प्रकार इस प्रजाति के बचे हुए अंतिम पौधे वायु में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन की अधिक सांद्रता के संपर्क में आ सके। और उस समय उनके आनंद और हर्ष का ठिकाना नहीं रहा जब पौधे जल्दी ही विकसित होने लगे और कुछ सप्ताहों के बाद आठ पौधे पनपने लगे, वे अपेक्षाकृत अधिक मोटी, अधिक हरी और अधिक चौड़ी पत्तियों के साथ परिपक्वता हासिल करने लगे। नवंबर 2009 में Kew के N. thermarum के संग्रह में पहली बार फूल लगे।


संदर्भ एवं श्रेय

Kew विज्ञान संपादक: कार्लोस मैग्डेलना
कॉपी सम्पदान: एम्मा ट्रेडवेल
Kew निम्नलिखित सहयोगकर्ताओं को धन्यवाद देता है: प्रोफेसर एबरहार्ड फिशर और Botanische Garten Bonn.