Nelumbo nucifera (पवित्र कमल)

5,000 हजार वर्षों से दैवी प्रतीक के रूप में सम्मानित पवित्र कमल सही अर्थों में एक प्रतिमापरक पौधा है।

Nelumbo nucifera फूल
Nelumbo nucifera फूल (चित्र: वुल्फगैंग स्टूपी)

प्रजाति संबंधी जानकारी

  • वैज्ञानिक नाम: Nelumbo nucifera Gaertn.
  • प्रचलित नाम: पवित्र कमल, भारतीय कमल
  • संरक्षण स्थिति: चीन की संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल।
  • प्राकृतिक वास: उष्ण कटिबंधीय जलवायु से गर्म-समशीतोष्ण, विभिन्न प्रकार के छिछले दलदलीय वासों (2.5 मीटर की गहराई तक) में पाया जाता है, जिनमें बाढ़ आने की संभावना वाली नदियों की तलछट से निर्मित उनके समीप स्थित गहरी सतह वाली भूमि (फ्लडप्लेन), तालाब, झील, पोखरे, समुद्रीताल, दलदल, कीचड़ और जलाशयों का खड़ा पानी शामिल है।
  • ज्ञात खतरे: कोई भी ज्ञात नहीं हालाँकि Nelumbo nucifera में न्युसिफेराइन, एपोर्फाइन और आर्मेपैवाइन जैसे कुछ अल्कलायड शामिल होते हैं।

वर्गीकरण

  • वर्ग: इक्विसेटोप्सिडा
  • उप-वर्ग: मैग्नोलिडा
  • उपगण: प्रोटिएना
  • गण: प्रोटीएल्स
  • परिवार: नेलुम्बोनैसी
  • वंश: Nelumbo

इस प्रजाति के बारे में

यह जल में पाया जाने वाले एक बहुवार्षिकी आकर्षक पुष्प है, पवित्र कमल जिसको लंबे समय से वाटर लिलीज़ का निकट संबंधी माना जाता रहा है। लेकिन कमल के पुष्प और वाटर लिली में उल्लेखनीय भिन्नता, विशेषकर इसके केंद्र स्थित प्रतिशंकु रूप वाली (आइसक्रीम कोन के आकार जैसी) धानी के कारण, पाई जाती है, जिसमें पारस्परिक रूप से मुक्त असंख्य अंडप स्थित होते हैं। हाल में किए गए आण्विक शोध ने दर्शाया है कि पवित्र कमल के निकटतम संबंधी मैदानी वृक्ष (Platanus प्रजातियाँ, Platanaceae) और प्रोटीआ परिवार के सदस्य (Proteaceae) हैं। उनकी अलग-थलग जाति वृत्तीय स्थिति संकेत देती है कि Nelumbo और Platanus दोनों जीवित जीवाष्म हो सकते हैं (एक प्राचीन और पूर्व काल में अपेक्षाकृत अधिक विविधतापूर्ण समूह के एकमात्र जीवित प्रतिनिधि)।

भौगोलिकता एवं वितरण

जंगलों में पवित्र कमल एशिया (ईरान से लेकर चीन, जापान और न्यू गुएना) और उत्तरपूर्वी आस्ट्रेलिया के उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में गर्म समशीतोष्ण अवस्था में पाया जाता है।

Nelumbo nucifera पत्तियाँ

Nelumbo nucifera पत्तियाँ (चित्र: वुल्फगैंग स्टूपी)

पवित्र कमल जल में पाया जाने वाला बहुवर्षिकी पौधा होता है जो प्रकंदयुक्त होता है (जिसे अकसर गलती से ‘जड़’ कहा जाता है), यह छिछले तालाबों, झीलों, समुद्रीतालों, दलदलों और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के तल पर कीचड़ में उगता है। इसकी लंबी छत्रिकाकार (जिस पर पत्तियों का वृंत किनारे के बजाय केंद्र पर लगा होता है) पत्तियाँ लंबे पर्णवृतों पर पानी की सतह से 1 से 2 मीटर ऊपर की ओर निकली होती हैं। इसकी पत्तियों की उल्लेखनीय जल विकर्षक सतह ने ‘कमल प्रभाव’ शब्द के सृजन की प्रेरणा दी। यह शब्द पत्तियों की स्वतः स्वच्छताकारी क्षमता को वर्णित करता है, जो पत्तियों की एक जटिल नैनो संरचना के कारण जल की छोटी बूँदों द्वारा धूल के कणों को चुन लिए जाने का परिणाम होती है, जिसकी वजह से चिपकाव काफी कम हो जाता है।

पवित्र कमल के फल की आकृति एक हद तक शॉवर-हेड के समान होती है
पवित्र कमल के फल की आकृति एक हद तक शॉवर-हेड के समान होती है (चित्र: वुल्फगैंग स्टूपी)

पवित्र कमल के फूल जून और अगस्त के बीच पुष्पित होते हैं। उनका व्यास 10-23 सेमी होता है और वे पुष्पवृंतों (वृंत) पर उत्पन्न होते हैं जो पत्तियों के पर्णवृंतों से लंबे होते हैं। कमल के एक सामान्य फूल में 16-36 तक श्वेत, गुलाबी या लाल परिदल (बाह्य पंखुड़ियाँ और बाह्यदल) होते हैं लेकिन अतिरिक्त पंखुड़ियों वाले पुष्पों (double varieties) में एक पुष्प में 160 परिदल तक हो सकते हैं। पुष्प के केंद्र में स्थित उभरी हुई धानी का व्यास 5-10 सेमी होता है और वह विशिष्ट प्रकार के बड़े फल के रूप में विकसित होती है जिसकी आकृति एक हद तक शॉवर-हेड जैसी होती है। ‘शॉवर-हेड’ का प्रत्येक छिद्र एक ग्रहणशील खंड को चिन्हित करता है जिनमें से प्रत्येक में एक अंडप होता है, जो फल के पकने पर एक अत्यंत कठोर आवरणयुक्त एकल बीज वाली नटिका (जिसे बहुधा गलती से ‘बीज’ कह दिया जाता है) में परिवर्तित हो जाती है।

नटिकाओं के परिपक्व होने पर उनके खंडों के छिद्र पर्याप्त रूप से बड़े हो जाते हैं जिनसे होकर वे निकल सकती हैं। अंततः, जब वायु लंबे फल-वृंत को झकझोरती है तब ये नटिकाएँ बाहर निकल आती हैं और जल में फिंक जाती हैं जहाँ पर वे तत्काल डूब कर तल पर पहुँच जाती हैं। यदि फल का वृंत टूट जाए तो उस स्थिति में उनके अपेक्षाकृत अधिक दूरी तक विखरने की संभावना होती है। शॉवर-हेड जिसका शीर्ष उसके तल की तुलना में चौड़ा होता है, उसके पानी में गिरते समय उसका चेहरा पानी की ओर झुका होता है। स्पंजी, वायु भरे ऊतकों के कारण फल जल की सतह पर तैरता रहता है, वह कुछ फल-नटिकाओं को तत्काल मुक्त कर देता है और कुछ को बाद में उस समय मुक्त करता है, जब बची हुई वायु उसके कक्षों से बाहर निकलती है।

संकट और संरक्षण

यद्यपि इसे प्रचुर मात्रा में उगाया जाता है, और इसकी विभिन्न प्रजातियाँ चयनित रूप से सैकड़ों वर्षों से उगाई जाती रही हैं, इसके बावजूद चीन के मध्य के मुख्य भूक्षेत्र में जल कृषि उद्योग के तीव्र विकास के कारण पवित्र कमल की स्थानीय जंगली आबादी काफी घट गई है। इसलिए हाल में चीन में Nelumbo nucifera को संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है।

हिंदुओं और बौद्धों के लिए पवित्र कमल का गहरा धार्मिक महत्त्व है, उनके लिए यह सौंदर्य पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक है। हिंदू धर्म में पवित्र कमल सूर्य का प्रतीक है और इसे उर्वरता के प्रतीक के रूप में देवी जगद् जननी से संबद्ध माना जाता है।

Nelumbo nucifera चीन में 3,000 वर्षों से अधिक समय से उगाया जा रहा है, और इसे केवल इसके सांस्कृतिक और शोभाकारी महत्त्व के नाते नहीं बल्कि इसके औषधीय प्रयोग एवं इसके खाए जाने योग्य ‘बीजों’ और प्रकंदों के लिए भी उगाया जाता है। उदाहरण के तौर पर चीन, जापान और भारत में प्रकंदों को भूना जाता है, उनका अचार बनाया जाता है, चाशनी में पकाया जाता है, उसके कतले काटे जाते हैं और उन्हें चिप्स के तौर पर तला जाता है। नटिकाफल से तैयार किए जाने वाली एक लपसी को भराव के तौर पर ‘मून केक्स’ में इस्तेमाल किया जाता है, जो एक पारंपरिक चीनी पेस्ट्री है। इसकी नवजात पत्तियाँ, पत्तियों के वृंतों और पुष्पों को भारत में सब्जी के रूप में खाया जाता है।

Nelumbonaceae का कुल एक वंशीय है (जिसमें केवल एक वंश शामिल है), लेकिन Nelumbo वंश में दो प्रजातियों का प्रतिनिधित्व है, एशियाई पवित्र कमल और पूर्वोत्तर अमेरिका का अमेरिकी या पीला कमल (Nelumbo lutea)। ठीक उसी तरह जैसे कि पवित्र कमल के प्रकंद को लंबे समय से चीन में खाया जाता रहा है, वैसे ही अमेरिकी कमल का प्रकंद मूल अमेरिकियों के लिए खाद्य स्रोत था।

चयनित रूप से उगाई जाने वाली ऐसी कई प्रजातियों का अस्तित्व है, जिनमें दोहरे स्वरूप भी शामिल हैं, जिनके फूलों के रंग का विस्तार विशुद्ध श्वेत और क्रीम से लेकर विभिन्न प्रकार की गुलाबी आभा और लाल रंग तक है।

Millennium Seed Bank: बीज भंडारण

Kew की Millennium Seed Bank partnership का लक्ष्य विश्व भर में पौध जीवन को रक्षित करना है, इसका ध्यान मुख्य रूप से उन पौधों पर केंद्रित है, जिनका अस्तित्व संकटग्रस्त है, और उसके साथ ही उन पौधों पर भी है जो भविष्य के लिए अत्यधिक उपयोगी हैं बीजों को सुखाया जाता है, पैक किया जाता है और हमारे बीज बैंक वाल्ट में शून्य से भी नीचे के तापमान पर भंडारित किया जाता है।

Millennium Seed Bank भंडारित बीच संग्रहों की संख्या: कोई नहीं। एक संबंधित प्रजाति Nelumbo lutea के दो संग्रह रखे गए हैं, ये दोनों Lady Bird Johnson Wildflower Centre, Austin, Texas से प्राप्त किए गए हैं।

बीज भंडारण संबंधी व्यवहार: आर्थाडोक्स (इस पौधे के बीज सुखाए जाने पर भी अपनी जीवन शक्ति में किसी महत्त्वपूर्ण ह्रास के बिना जीवित रहते हैं, और इसलिए MSB की तरह के दीर्घकालिक जमाव भंडारण के लिए अनुकूल हैं)

लंबे जीवन बीज

Nelumbo nucifera बीज

Nelumbo nucifera बीज (चित्र: वुल्फगैंग स्टूपी)

कमल के ‘बीजों’, जो वानस्पतिक दृष्टि से वायु और जल के लिए अभेद्य फलभित्ति वाले संग्रथित फल के नाटिकाफल हैं, के बारे में लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि वे सदियों तक जीवित रहते हैं। दंत कथाओं में वर्णित उनकी दीर्घजीविता का प्रमाण सन् 1995 में जेन शेन मिलर द्वारा ही उपलब्ध कराया जा सका।

कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जीव विज्ञानी पूर्व मंचूरिया (अब उत्तरी पूर्वी चीन का हिस्सा) की एक सूखी हुई झील के तल से प्राप्त किए कमल के बीजों को अंकुरित करने में सफल रहे। आधुनिक एक्सलेरेटर मास स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक ने बीजों को मारे बिना नटिका फलों की मोटी और कठोर फलभित्ती के एक टुकड़े के सटीक कार्बन तिथिकरण (डेटिंग) को संभव बना दिया है। इस पद्धति के जरिए अंकुरित हो रहे सबसे पुराने बीज की आयु 1288 (250 वर्ष तक अधिक या कम) वर्ष निर्धारित की गई।

पवित्र कमल के पुष्प

पवित्र कमल के पुष्प (चित्र: वुल्फगैंग स्टूपी)

पवित्र कमल को बीजों के माध्यम से प्रसारित किया जा सकता है। दीर्घ-जीवन वाले बीजों का आवरण अत्यधिक कठोर होता है, जिसके एक सिरे को अंकुरण से पूर्व भ्रूणकोष को अनावृत्त करने के लिए हटा दिया जाना चाहिए। 25-30˚ सेंटीग्रेट तापमान में रखे जाने पर 24 घंटे बाद पौद उद्‌गामित होने लगती है। पौदों को एक प्रकंद निर्मित करने के लिए प्रकाश के उच्च स्तर की आवश्यकता होती है, जो अपने जीवन के पहले जाड़े के मौसम के दौरान जीवित रहने के लिहाज से पर्याप्त बड़ा होता है।

इसका प्रसारण अंकुरण का मौसम शुरू होने से ठीक पूर्व, जाड़े के अंतिम दौर में विखंडन करके भी किया जा सकता है। Kew में यह कठिन कार्य पुनर्पात्रण के दौरान किया जाता है, तब पौधे प्रसुप्ति अवस्था में होते हैं। अंकुरण का मौसम समाप्त होने के बाद एक बड़े पात्र में कई प्रकंदों को प्राप्त करना संभव हो सकता है। अंकुरित होते हुए सिरों को क्षतिग्रस्त नहीं होना चाहिए इसलिए कंपोस्ट को अत्यधिक सावधानी के साथ हटाया जाना चाहिए और अंकुरित होते हुए सिरों को पहचान लिया जाना चाहिए। प्रसारण सामग्री में एक अंकुरित होता हुआ सिरा होना चाहिए, उसके पीछे एक संकुचित क्षेत्र होता है, उसके बाद एक कंद होता है, फिर एक अन्य संकुचित क्षेत्र होता है जिसके पीछे एक कंद होता है और अंततः उसके बाद भी एक संकुचित क्षेत्र होता है जिसके पीछे एक कंद होता है, जिस पर से कटाई की जा सकती है। ढाई गुलमों जैसी दिखने वाली इस सामग्री को किसी एकल पात्र में रखा जा सकता है।

प्रसारण सामग्री कम से कम 10 सेमी मिट्टी (दुम्मट) से ढकी होनी चाहिए और उसे ऐसी स्थिति में स्थापित होना चाहिए कि उसका अंकुरित होता सिरा पात्र के किनारों के संपर्क में आने के कारण क्षतिग्रस्त न हो। पात्र के शीर्ष और मिट्टी के बीच कम से कम 15 सेमी स्थान को रिक्त छोड़ दिया जाना चाहिए। यह रिक्त स्थान पात्र को तालाब से बाहर ले जाए जाने की स्थिति में जल संग्रहण के लिए स्थान उपलब्ध कराता है और तालाब में रहने के दौरान प्रकंद को पात्र के बाहर आने से रोकता है।

Kew में विभाजन और बीजारोपण, दोनों तरीकों से नए पवित्र कमल के पौधों को सफलतापूर्वक उत्पन्न किया गया है। परिपक्व पौधों को 50 लीटर के ऐसे गोल पात्रों में रखा गया, जिनमें निकासी के लिए कोई छिद्र नहीं था, क्योंकि निकासी छिद्र या चौकोर पात्रों के किनारे अंकुरित होते सिरों को रोक सकते थे। इन जलरोधी (वाटरटाइट) पात्रों को शिशिरलंघन (overwintering) के लिए Kew के प्रदर्शन गृहों से उष्णकटिबंधी नर्सरी में लाना-ले जाना संभव है। पौधों को हमेशा जल के नीचे 10-30 सेमी गहराई में रखा गया।

Kew में पात्रण के लिए बढ़िया किस्म की दुम्मट मिट्टी का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि इसमें पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, पानी में डूबोए जाने पर यह तैरती नहीं है और वृद्धि अवधि के दौरान प्रयोग में लाए जाने वाले ‘फूड बाल्स’ में फँस जाती है। इन फूड बाल्स को Kew में कार्बनिक खादों को गीली दुम्मट मिट्टी में मिश्रित करके और उन्हें लोज़ेंजेज में रोल करके तैयार किया जाता है। लोज़ेंजेज पात्र में मौजूद दुमट मिट्टी में प्रविष्ट कराए गए होते हैं। यह प्रक्रिया संपन्न करते समय सावधानी बरतनी चाहिए कि अंकुरित होते सिरे क्षतिग्रस्त न हों।

ब्रिटेन में जाड़ों के दौरान प्रकाश के निम्न स्तर के कारण पवित्र कमल प्रसुप्तावस्था में रहता है। इस दौरान कंदों को नमीयुक्त कीचड़ में पालामुक्त अवस्था में भंडारित किया जा सकता है। इसकी कठोरता परिवर्तनशील है; वैसे वृद्धि अवधि में अधिकतर पौधों के लिए तीव्र वृद्धि और अबाधित पुष्पण हेतु कम से कम 25˚ सेंटीग्रेट तापमान अपेक्षित होता है।

Kew में पवित्र कमल को चूर्णी मत्कुण (mealy bug), स्पाइडर माइट (चिचड़ी) और ऐफिड्स से खतरा रहता है। किसी भी समस्या का उपचार रसायनों से करना कठिन होता है क्योंकि पत्तियाँ कीटनाशकों, अल्कोहल, ह्वाइट आयल, पौधों के बलवर्धकों और साबुन के प्रति संवेदनशील होती हैं। इसके बावजूद संवर्धन-नियंत्रणों को यथासंभव व्यवहार में लाया जाता है।

Kew में पवित्र कमल

कमल के बीजों की माला

कमल के बीजों की माला (चित्र: RBG Kew)

कभी कभी पवित्र कमल को Kew के Waterlily House में प्रदर्शित होता हुआ देखा जा सकता है।

Nelumbo nucifera के बीस नमूने Economic Botany Collection (आर्थिक वनस्पति विज्ञान संग्रह) में रखे हुए हैं, जो Kew का गतिविधियों के नेपथ्य में स्थित एक क्षेत्र है, ये पहले से समय तय किए जाने पर विश्व भर के सच्चे शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध हैं। सामग्रियों में पुष्प, फल बीज, प्रकंद से प्राप्त स्टार्च औऱ नटिकाफलों का आटा शामिल है। आइटम्स में पवित्र कमल के नटिकाफलों से निर्मित एक नेकलेस भी है जो चित्र में दिखाई दे रहा है, बाएँ।

Kew की गतिविधियों के नेपथ्य में स्थित एक अन्य क्षेत्र Herbarium (हर्बेरियम) में Nelumbo nucifera के अल्कोहल में संरक्षित दो अन्य नमूने रखे हुए हैं। इन नमूनों से संबंधित विवरण Herbarium Catalogue (हर्बेरियम कैटलॉग) में देखे जा सकते हैं, और ये नमूने पहले से समय तय किए जाने पर सच्चे शोधकर्ताओं के लिए स्वयं उपलब्ध हैं।

Kew शोध: परागकणों का विकास और विकासक्रम

अधिक जानकारी
चतुष्फलकीय चतुष्कों (tetrahedral tetrads) में विकसित होते

चतुष्फलकीय चतुष्कों (tetrahedral tetrads) में विकसित होते परागकण (चित्र: हान्ना बैंक्स)

Kew के वैज्ञानिक डॉ. हान्ना बैंक्स और भूतपूर्व निर्देशक प्रोफेसर सर पीटर क्रेन एक ऐसी टीम के सदस्य रहे हैं जिसने Nelumbo परागकणों के विकास और विकासक्रम के बारे में शोध किया था।

हाल के कार्य में Nelumbo परागकण के छिद्र की परिवर्तनशीलता का अध्ययन शामिल किया गया है। छिद्र परागकण की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है। वे परागकण कठोरभित्ति में स्थित रिक्तियाँ हैं, जिनके जरिए घोलों और रासायनिक सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सकता है, और जिसके जरिए पराग नलिकाएँ अंकुरित होती हैं। विकासक्रम के दौरान उनका रूप, आकार और संबंधित स्थिति परिवर्तित हो गई, दाने के सिरे पर स्थित एक छिद्र से (जिसे एक खांची के रूप में जाना जाता है) से मध्य के इर्दगिर्द समान दूरियों पर छितराए तीन छिद्र (जिन्हें ट्राइएपेर्चेरेट या त्रिविदारकी के रूप में जाना जाता है) बन गए।

यह क्यों घटित हुआ?

यह कैसे और क्यों हुआ इसे अब तक पूरी तरह समझा नहीं जा सका है पर सभी एंजियोस्पर्म (पुष्पित होने वाले पौधे) की लगभग तीन चौथाई प्रजातियाँ यूडिकॉट क्लैड (eudicot clade) से संबंधित हैं, जो आकृतीय स्तर पर एक सिनैपोमॉर्फी (व्युत्पन्न साझा लक्षण) — त्रिछिद्रीय परागकण के माध्यम से परस्पर जुड़ी हुई हैं। इसलिए ऐसा लगता है कि त्रिछिद्रीय प्रतिमान पर आधारित परागकण एक महत्त्वपूर्ण और सफल विकास हैं जो यूडिकॉट सफलता में निहित एक मुख्य नवप्रवर्तन की अभिव्यक्ति हो सकते हैं।

आण्विक डेटा संकेत देते हैं कि Nelumbo यूडिकॉट क्लैड के सबसे पहले शाखन करने वाले सदस्यों में से एक है। Kew में शोध करके पहले रिपोर्ट किए गए इन प्रमाणों को निरीक्षित किया गया कि Nelumbo फूलों के परागकोष में त्रिविदरकी और एक खांची परागकण प्रकार साथ-साथ उत्पन्न होते हैं। Kew के अध्ययन में केवल त्रिविदारकी परागकण प्रकार और उससे संबद्ध विकास को पाया गया, यद्यपि कुछ विपथगामी परागकण भी पाए गए।


संदर्भ और श्रेय

Kew विज्ञान संपादक: वुल्फगैंग स्टूपी
Kew सहयोगकर्ता: स्टीव डेविस (Sustainable Uses Group), हान्नाह बैंक्स, कार्लोस मैग्डेलना
कॉपी संपादन:
एम्मा ट्रेडवेल